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अंक 006

सर्दियों में क्या खाएँ? आयुर्वेद के अनुसार शीत ऋतु का आहार

✍ नाड़ी वैद्य डॉ. अजीत सिंह यादव · 📅 01 November 2026

🌿 आयुर्वेद ज्ञानमाला — नाड़ी वैद्य के संग | अंक 006

हेमंत-शिशिर की ठंड में अग्नि को सही ईंधन — थाली में क्या रखें, किससे बचें

लेखक: नाड़ी वैद्य डॉ. अजीत सिंह यादव (BAMS) • सह-लेखक: नाड़ी वैद्य डॉ. सलोनी यादव वशिष्ठ (BAMS, MD (DN)), नाड़ी वैद्य डॉ. मोहित वशिष्ठ (BAMS, MD (AM))
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सर्दियों में क्या खाएँ — आयुर्वेदिक शीतकालीन आहार, नाड़ी वैद्य गुरुकुल
अंक 006

सर्दियों में क्या खाएँ?

ठंड में अग्नि प्रबल — पौष्टिक, गरम, स्निग्ध भोजन का समय

सर्दियों में क्या खाएँ? आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों (हेमंत और शिशिर ऋतु) में शरीर की पाचन-अग्नि सबसे प्रबल होती है, इसलिए यह समय गरम, स्निग्ध (घी-तेल युक्त), पौष्टिक और ताज़ा पका भोजन खाने का है — जैसे गेहूँ, बाजरा, उड़द, मौसमी साग, गाजर, शकरकंद, तिल, गुड़, दूध-घी और गरम पानी। ठंडा, बासी, बहुत रूखा भोजन और लंबा भूखा रहना इस ऋतु में ठीक नहीं माना गया।

क्या आपने ध्यान दिया है कि ठंड आते ही भूख अपने-आप बढ़ जाती है? गर्मियों में जो खाना भारी लगता था, वही दिसंबर में आराम से पच जाता है। ऐसा क्यों होता है — और इस बढ़ी हुई भूख का सही उपयोग कैसे करें?

हमारी दादी-नानी यह बात बिना किसी किताब के जानती थीं। कार्तिक लगते ही घरों में तिल-गुड़ की गज़क, बाजरे की रोटी, सरसों का साग, गाजर का हलवा, मेथी के पराठे और गोंद-मेवे के लड्डू बनने लगते थे। “सर्दी में खाया, साल भर का कमाया” — यह कहावत आयुर्वेद की ऋतुचर्या का ही लोक-रूप है।

अंक 004 में हमने पढ़ा कि स्वस्थ व्यक्ति की पहली कसौटी है — सम अग्नि। आज देखेंगे कि ऋतु बदलने पर अग्नि कैसे बदलती है और सर्दियों की थाली उसी के अनुसार कैसे सजाएँ।

🌿 आज का स्वास्थ्य सूत्र

“ठंड में अग्नि तेज़ होती है — उसे सही ईंधन न दें, तो वह शरीर को ही सुखाने लगती है।”

चरक संहिता हेमंत ऋतु की अग्नि के बारे में स्पष्ट कहती है —

“शीते शीतानिलस्पर्शसंरुद्धो बलिनां बली।
पक्ता भवति हेमन्ते मात्राद्रव्यगुरुक्षमः॥”

भावार्थ: हेमंत ऋतु में ठंडी हवा के स्पर्श से (शरीर के भीतर) रुकी हुई अग्नि बलवान लोगों में और भी बलवान हो जाती है, और वह अधिक मात्रा व भारी पदार्थों को भी पचाने में समर्थ होती है। (चरक संहिता, सूत्रस्थान, अध्याय 6 — तस्याशितीय)

1. आयुर्वेद क्या कहता है — सर्दी में अग्नि क्यों प्रबल होती है?

आयुर्वेद ने साल को छह ऋतुओं में बाँटा है। लगभग मध्य नवंबर से मध्य जनवरी तक हेमंत और उसके बाद मध्य मार्च तक शिशिर ऋतु मानी जाती है (क्षेत्र के अनुसार थोड़ा अंतर रहता है)। ये दोनों ऋतुएँ “विसर्ग काल” के अंत और “आदान काल” की शुरुआत में आती हैं — जब शरीर का बल अपेक्षाकृत सबसे अच्छा माना गया है।

ठंडी हवा त्वचा के रोम-छिद्रों को संकुचित कर देती है, जिससे शरीर की गर्मी भीतर ही रुकी रहती है। यही रुकी हुई गर्मी जठराग्नि को तेज़ कर देती है। अब अगर इस तेज़ अग्नि को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन न मिले, तो ग्रंथों के अनुसार वह शरीर के रस आदि धातुओं को ही “पचाने” लगती है — और वात बढ़ता है: त्वचा रूखी, जोड़ों में अकड़न, थकान, कब्ज़।

इसीलिए इस ऋतु में आयुर्वेद मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा) और लवण (नमकीन) रस प्रधान, स्निग्ध और पौष्टिक भोजन की सलाह देता है। चरक संहिता हेमंत में दूध से बनी चीज़ें, गन्ने से बनी चीज़ें (गुड़ आदि), घी-तेल, नए अन्न और गरम पानी को हितकर बताती है।

2. सर्दियों की आयुर्वेदिक थाली — क्या खाएँ?

भोजन-वर्ग इस ऋतु के अनुकूल (अपनी पाचन-शक्ति के अनुसार)
🌾 अनाज गेहूँ, बाजरा, मक्का, नया चावल, जौ; दलिया और खिचड़ी
🫘 दालें उड़द, मूँग, कुलथी, राजमा — अच्छी तरह पकी हुई, हींग-अदरक-जीरे के तड़के के साथ
🥬 सब्ज़ियाँ सरसों, मेथी, बथुआ, पालक जैसे साग; गाजर, चुकंदर, शकरकंद, शलगम, मटर, लौकी, कद्दू
🍊 फल आँवला, संतरा, अमरूद, अनार, सेब, पपीता — दिन में, कमरे के तापमान पर
🥛 दूध व घी गरम दूध (हल्दी या सोंठ के साथ परंपरा में), घी, ताज़ा मक्खन, पनीर
🌰 तिल-गुड़-मेवे तिल, गुड़, मूँगफली, बादाम, अखरोट, खजूर — थोड़ी मात्रा में, भूख के अनुसार
🫚 मसाले अदरक/सोंठ, हल्दी, काली मिर्च, अजवाइन, दालचीनी, लौंग, हींग — संतुलित मात्रा में
♨️ पेय गुनगुना या गरम पानी, सब्ज़ियों का सूप, दाल का पानी, अदरक-तुलसी का काढ़ा (परंपरा अनुसार)

ध्यान दें — “पौष्टिक” का अर्थ “तला-भुना” नहीं है। घर का ताज़ा पका, गरम, घी की उचित मात्रा वाला भोजन ही आयुर्वेद का स्निग्ध भोजन है; बाज़ार की तली चीज़ें और बार-बार गरम किया तेल नहीं।

3. सर्दियों में किन चीज़ों से बचें?

  • फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और ठंडी चीज़ें — ये अग्नि को मंद और कफ को बढ़ाती हैं
  • बासी, बार-बार गरम किया या बहुत पहले बना भोजन
  • बहुत रूखा, बहुत हल्का या केवल सलाद-आधारित भोजन (विशेषकर वात प्रकृति वालों के लिए)
  • लंबे समय तक भूखा रहना या बिना मार्गदर्शन के लंबे उपवास — प्रबल अग्नि में यह वात बढ़ाता है
  • रात को देर से भारी भोजन और तुरंत सो जाना
  • दिन में सोना — इस ऋतु में यह कफ बढ़ाता है

4. आहार के साथ विहार — सर्दियों की दिनचर्या

आयुर्वेद में भोजन अकेला नहीं चलता; विहार (जीवन-शैली) उसका साथी है। हेमंत-शिशिर में ग्रंथ इन बातों पर ज़ोर देते हैं —

  • अभ्यंग (तेल मालिश): नहाने से पहले तिल या सरसों के तेल से हल्की मालिश — रूखापन और वात कम करने के लिए
  • व्यायाम: इस ऋतु में अपनी क्षमता के अनुसार अपेक्षाकृत अधिक व्यायाम — तभी पौष्टिक भोजन ठीक से पचता है
  • धूप: सुबह की कोमल धूप में कुछ समय बैठना
  • गरम कपड़े और गुनगुने पानी से स्नान — बहुत गरम पानी सिर पर न डालें
  • समय पर उठना: ठंड में भी नियमित दिनचर्या — अंक 003 — ब्राह्म मुहूर्त में बताई सावधानियों के साथ

स्वास्थ्य सूत्र

“सर्दी का पौष्टिक भोजन तभी बल देता है, जब साथ में मेहनत और धूप भी हो।”

5. आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

आधुनिक पोषण-विज्ञान भी मौसमी भोजन के कई लाभ मानता है। सर्दियों की गाजर, शकरकंद और हरे साग विटामिन A (बीटा-कैरोटीन), फ़ोलेट, आयरन और फ़ाइबर के अच्छे स्रोत हैं; आँवला, संतरा और अमरूद विटामिन C देते हैं। तिल, मूँगफली और मेवों में अच्छे वसा, प्रोटीन और कई खनिज होते हैं।

ठंड में शरीर को अपना तापमान बनाए रखने के लिए कुछ अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, और कई लोगों को इस मौसम में भूख अधिक लगती है। दूसरी ओर, सर्दियों में लोग पानी कम पीते हैं, धूप कम लेते हैं और शारीरिक गतिविधि घट जाती है — इसलिए वज़न बढ़ने, कब्ज़ और विटामिन D की कमी की शिकायतें भी आम हैं।

निष्कर्ष वही है जो आयुर्वेद कहता है: बढ़ी हुई भूख का उपयोग पौष्टिक, घर के बने भोजन के लिए करें — मिठाई और तली चीज़ों के लिए नहीं — और साथ में गतिविधि, धूप और पानी बनाए रखें।

6. सात प्रकृतियाँ — किसकी सर्दी की थाली कैसी?

प्रकृति सर्दियों में विशेष ध्यान
🌬️ वात सबसे अधिक लाभ इसी ऋतु के स्निग्ध भोजन से — घी, गरम सूप, उड़द-मूँग, तिल; रूखे-ठंडे भोजन और भूखे रहने से बचें
🔥 पित्त पौष्टिक भोजन लें पर बहुत तीखा-गरम मसाला, अधिक अदरक-लहसुन और तले भोजन से बचें; घी, दूध, आँवला अनुकूल
🌿 कफ अग्नि तेज़ हो तब भी मिठाई, दही रात में, अधिक घी-तेल और दिन में सोने से बचें; बाजरा, जौ, सोंठ, गरम पानी और व्यायाम अनुकूल
🌬️🔥 वात-पित्त गरम-स्निग्ध भोजन, पर मसाले संतुलित; घी, दूध, शकरकंद, मीठे फल
🔥🌿 पित्त-कफ हल्के-पौष्टिक के बीच संतुलन; मौसमी साग, मूँग, जौ; मिठाई और तला सीमित
🌬️🌿 वात-कफ गरम, ताज़ा, मसालेदार पर अधिक भारी नहीं; अदरक, काली मिर्च, सूप; ठंडी चीज़ों से पूरी तरह बचें
🌬️🔥🌿 सम प्रकृति ऋतुचर्या का सामान्य पालन — मौसमी, ताज़ा, संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम

अपनी प्रकृति स्वयं अनुमान से तय न करें — योग्य वैद्य से परामर्श लेकर ही आहार में बड़े बदलाव करें।

7. किन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

  • डायबिटीज़ वाले: गुड़, लड्डू, गज़क, हलवा और शकरकंद की मात्रा अपने डॉक्टर की सलाह से तय करें — “गुड़ है तो नुक़सान नहीं” यह धारणा सही नहीं
  • बढ़ा वज़न, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग वाले: घी, मेवे और तली चीज़ें सीमित रखें; अपने चिकित्सक से पूछें
  • कमज़ोर पाचन वाले, बहुत बुज़ुर्ग और छोटे बच्चे: सबकी अग्नि एक जैसी नहीं होती; भारी भोजन धीरे-धीरे और भूख देखकर दें
  • गर्भवती महिलाएँ: गोंद-मेवे के लड्डू, जड़ी-बूटी वाले पाक आदि अपने डॉक्टर या योग्य वैद्य से पूछकर ही लें
  • एसिडिटी या पित्त की तकलीफ़ वाले: अधिक मसाले, अदरक और तले भोजन से बचें
  • जो दवाएँ ले रहे हैं, वे कोई जड़ी-बूटी या पाक शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक को अवश्य बताएँ

8. इस ऋतु में — कार्तिक की ठंड, हेमंत की तैयारी

उत्तर भारत में अभी कार्तिक मास चल रहा है — सुबह-शाम ठंडक शुरू हो गई है, पर दिन में धूप अब भी तेज़ है। यह शरद से हेमंत की ओर बदलाव का समय है। ऋतु-संधि में आयुर्वेद अचानक नहीं, धीरे-धीरे बदलाव की सलाह देता है।

इसलिए अभी से एकदम भारी पाक और लड्डू शुरू न करें। पहले ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी, सुबह थोड़ा तिल-गुड़, भोजन में घी की उचित मात्रा और मौसमी साग-सब्ज़ियाँ जोड़ें। नवंबर के मध्य से जैसे-जैसे ठंड और भूख बढ़े, वैसे-वैसे पौष्टिक भोजन बढ़ाएँ।

🩺 9. नाड़ी परीक्षा — “मेरे लिए कौन-सा भोजन?”

एक ही घर में एक व्यक्ति को सर्दियों में गाजर का हलवा बल देता है और दूसरे को भारीपन और खाँसी। कारण है — प्रकृति और अग्नि का अंतर। नाड़ी परीक्षा में वैद्य नाड़ी की गति • लय • बल • गहराई के साथ व्यक्ति की प्रकृति, आज की अवस्था (विकृति), अग्नि का बल और ऋतु का प्रभाव समझने का प्रयास करते हैं — ताकि आहार की सलाह “सबके लिए एक जैसी” न होकर व्यक्ति के अनुसार हो।

नाड़ी वैद्य डॉ. अजीत सिंह यादव जी के 36+ वर्षों के क्लीनिकल अनुभव में ऋतु के अनुसार आहार-विहार की सलाह नाड़ी परीक्षा का मुख्य अंग रही है। नाड़ी वैद्य परिवार को फ़िल्म जगत, रॉयल फ़ैमिलीज़, प्रमुख बिज़नेस फ़ैमिलीज़ और अंतरराष्ट्रीय रोगियों के साथ परामर्श का अनुभव है, और नाड़ी वैद्य गुरुकुल से प्रशिक्षित नाड़ी वैद्य आज देश के लगभग हर राज्य में सेवा दे रहे हैं।

“नाड़ी को केवल छूना नहीं — नाड़ी से जुड़ना पड़ता है।”

यह विद्या सीखना चाहें तो देखें — नाड़ी परीक्षा कोर्स।

नाड़ी परीक्षा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक समग्र मूल्यांकन पद्धति है; यह लैब टेस्ट या आधुनिक जाँचों का विकल्प नहीं है।

🏡 10. आज का Practical Experiment — सात दिन की “सर्दी की थाली”

सात दिन ये छोटे-छोटे बदलाव करके देखें और रोज़ एक डायरी में लिखें —

  • पहले दिन से: फ्रिज का पानी बंद — दिन भर गुनगुना पानी
  • रोज़ एक मौसमी सब्ज़ी या साग — सरसों, मेथी, बथुआ, गाजर, शकरकंद में से
  • सुबह थोड़ा तिल-गुड़ या कुछ भीगे मेवे — भूख और पाचन के अनुसार (डायबिटीज़ वाले डॉक्टर की सलाह से)
  • रात का भोजन सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले, गरम और अपेक्षाकृत हल्का
  • 15–20 मिनट धूप और रोज़ थोड़ा व्यायाम
  • सप्ताह में 2–3 बार नहाने से पहले तेल मालिश
  • डायरी में लिखें: भूख कैसी रही, पेट साफ़ हुआ या नहीं, त्वचा, नींद और ऊर्जा

सात दिन बाद देखें कि शरीर ने क्या कहा। अगर भारीपन, खाँसी-ज़ुकाम, एसिडिटी या पेट की तकलीफ़ बढ़े, तो बदलाव रोककर योग्य वैद्य से परामर्श लें।

पिछले अंक पढ़ें: अंक 005 — नाड़ी विज्ञान क्या है? • अंक 004 — स्वस्थ किसे कहते हैं? • अंक 003 — सुबह कितने बजे उठें? • अंक 001 — आयुर्वेद क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सर्दियों में क्या खाना चाहिए?
आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में गरम, स्निग्ध और पौष्टिक भोजन लें — गेहूँ, बाजरा, उड़द-मूँग, मौसमी साग, गाजर, शकरकंद, आँवला, तिल, गुड़, दूध-घी और गुनगुना पानी — अपनी पाचन-शक्ति और प्रकृति के अनुसार।

सर्दियों में भूख ज़्यादा क्यों लगती है?
ठंडी हवा से शरीर की गर्मी भीतर रुकती है और जठराग्नि प्रबल हो जाती है — चरक संहिता के अनुसार हेमंत में अग्नि भारी और अधिक मात्रा का भोजन पचाने में समर्थ होती है। आधुनिक दृष्टि से भी ठंड में शरीर तापमान बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करता है।

क्या सर्दियों में घी और गुड़ सबके लिए अच्छे हैं?
नहीं, सबके लिए एक जैसे नहीं। वात प्रकृति और सामान्य पाचन वालों के लिए ये अनुकूल माने गए हैं, पर डायबिटीज़, बढ़े वज़न, हाई कोलेस्ट्रॉल या कमज़ोर पाचन वाले अपने चिकित्सक या योग्य वैद्य की सलाह से ही मात्रा तय करें।

सर्दियों में किन चीज़ों से बचना चाहिए?
फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, बासी भोजन, बहुत रूखा भोजन, लंबा भूखा रहना, रात में देर से भारी भोजन और दिन में सोना — इनसे इस ऋतु में बचने की सलाह दी जाती है।

क्या नाड़ी परीक्षा से पता चल सकता है कि मुझे सर्दियों में क्या खाना चाहिए?
नाड़ी परीक्षा में वैद्य प्रकृति, अग्नि और दोषों की वर्तमान अवस्था समझने का प्रयास करते हैं, जिससे व्यक्ति के अनुसार आहार-विहार की सलाह दी जा सके। यह एक पारंपरिक समग्र मूल्यांकन है; यह लैब टेस्ट या आधुनिक जाँचों का विकल्प नहीं है। यह विद्या सीखना चाहें तो नाड़ी परीक्षा कोर्स देखें।

🌿 आज की सबसे महत्वपूर्ण बात

“सर्दी में अग्नि प्रबल है — उसे ताज़ा, गरम, पौष्टिक भोजन दें; पर अपनी प्रकृति, पाचन और रोग का ध्यान रखकर।”

याद रखने का सरल सूत्र —

🔥 अग्नि — ठंड में सबसे तेज़
🍲 भोजन — गरम, ताज़ा, स्निग्ध
🥬 थाली — मौसमी साग, गाजर, शकरकंद, आँवला
🌰 तिल-गुड़ — थोड़ा, भूख के अनुसार
🚫 बचें — ठंडा, बासी, रूखा, लंबा भूखा रहना
🏃 साथ में — व्यायाम, धूप, तेल मालिश
🩺 सावधानी — डायबिटीज़, वज़न, कमज़ोर पाचन में सलाह लेकर

🔔 कल सुबह पढ़िए — अंक 007

🌍 पंचमहाभूत क्या हैं?

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — वे पाँच तत्व जिनसे आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर, भोजन और पूरा ब्रह्मांड बना है।

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लेखक: नाड़ी वैद्य डॉ. अजीत सिंह यादव (BAMS) — संस्थापक व अध्यक्ष, नाड़ी वैद्य ग्रुप • सह-लेखक: नाड़ी वैद्य डॉ. सलोनी यादव वशिष्ठ (BAMS, MD (DN)) — CEO, नाड़ी वैद्य गुरुकुल • नाड़ी वैद्य डॉ. मोहित वशिष्ठ (BAMS, MD (AM)) — CEO, नाड़ी वैद्य फ़ार्मेसी

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यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी रोग या दवा के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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